जब आप प्यार में होते हैं..

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जब आप प्यार में होते हैं, तो आप खुश रहते हैं,
स्वस्थ होते है ।

आंखों में नशा होता है ।

होठों पे मुस्कान होती है ।

पेट ठीक रहता है ।

दिल इतना बड़ा हो जाता है कि सबको माफ कर देता है ।

क्षुद्रता से ऊपर उठ जाता है ।

आप बेवजह हंसते हैं ।

सबसे बात करते हैं मगर बेवजह नहीं करते ।

भूख बढ़ जाती है ।

आप द्वैत से मुक्त और आत्मस्थित (स्वस्थ) हो जाते हैं ।

प्यार करो । 

और यदि अपने आप हो जाए तो बेहतर ।

जिन्हें अपने आप किसी से प्यार होता है, उनका जीवन तो धन्य है ।

वो नमन करने योग्य हैं ।

ग़व्वास-ए-मोहब्बत का अल्लाह निगेहबां हो,
हर क़तरा-ए-दरिया भी; दरिया की है गहराई ।
(इक़बाल साहब का शे’र है।)

जब आप प्यार में होते हैं
तो हर लम्हा खास होता है ।

तमाम दुनियावी जंजालों से दूर
राजनीतिक – धार्मिक – सांप्रदायिक बहसों से परे
आप अपने प्यार मे रम रहे होते हैं ।

पैदा होने की तारीख कितनी ही दूर क्यों ना हो गई हो
या जीवन अपने अंतिम बिंदु पर आ खड़ा हुआ हो
आप बेवकूफ़ी करते हैं
जानकर और सोच कर

वर्षों पहले दफ़्न हुआ बचपन ज़िंदा होकर नाचने लगता है ।

प्यार में होना इम्तहान भी है
उन दिलों के लिए
जो सामाजिक – धार्मिक – सांस्कृतिक – राजनीतिक परिवेश से घिरे हैं ।

इतने झंझावातों के बीच दिल में (किसी के लिए) प्यार बने रहना किसी भी तप से बढ़कर है ।

प्यार को दुनिया के ज़ुल्म नहीं सहना पड़ता
लोगों के ज़ुल्म नहीं सहना पड़ता
लोग और लोगों से बनी दुनिया तो बहुत प्रेम मयी है ।

लोगों का समाज – धर्म – रिवाज़ – संस्कृति और रिश्ते
प्यार को सीमित और खंडित कर देते हैं ।

प्यार में होना बड़ी बात है
प्यार करना बिल्कुल भी ठीक नहीं ।

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