वर्ष का ‘रूपांतरण’

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और एक नया साल शुरू हुआ ।

अगर इस साल अपेक्षित इच्छाओं की पूर्ति ना हुई तो फिर नया भी पुराना हो कर खत्म तो हो ही जाना है ।
लेकिन 2016 की शुरुआत मैंने अलग तरह से की है ।

वैसे नया कुछ हुआ नहीं है । सब जैसे का वैसा ही है । कैलेंडर चेंज हुआ है और कुछ नही, लेकिन यह मानसिकता कि साल खत्म हुआ और शुरू हुआ, सो तो है । हाँ लौकिक रूप में समय को हम काट काट कर देखते हैं, अपनी सुविधा के लिए ।

मजेदार बात है कि प्रकृति को इससे कोई लेना देना नहीं ।

खैर ।

लेख में उदासीनता और बेवजह की दार्शनिकता ठूंसे जाने का बोध मुझे भी है, लेकिन आप इसे मेरी प्रवृत्ति समझें या मेरी प्रकृति, ऐसा अपने आप हुआ और मैं इस बात का दोष नहीं लेना चाहता कि लेख बोझिल हो गया ।

चाहूं तो पचास बहाने गिना दूंगा ।

तो 2016 का कैलेंडर दीवारों पर मटकने लगा ।
9 जनवरी को दादर में नाटक करना है, ‘मोती चुन ले हंसा’ का शो है। आगे का कुछ पता नही मगर इतना तय है कि 9 जनवरी या 10 जनवरी तक जीना होगा ।
‘मूर’ के भक्त मेरे ‘सामान्य ज्ञान’ को देखकर सिर पीटे मैं चाहता भी यही हूं ।

नए साल की चाय में स्वाद तो पुराना ही है । यह कमाल की बात है ।

व्हाट्सअप बंद रखूंगा आज । और फेसबुक भी नही खोलूंगा आज । टोटली आइसोलेटेड आज के लिए । अपने, खुद के साथ रहना है ।

कल की रात और आज की सुबह नयापन यह था कि मैंने प्रार्थना की । नास्तिक हूं सो पूजा करने की मूर्खता मैंने नहीं किया । प्रार्थना हुई । रात प्रार्थना करते नींद में गया और सुबह जागा तो पाया कि प्रार्थना चालू थी । प्रार्थना में सभी पंच तत्वों, ऊर्जा और पदार्थों, सजीवो – निर्जीवो के प्रति धन्यवाद प्रेषित किया और इस साल मेरी अपेक्षाओं को पूर्ण करने हेतु सहयोग मांगा । सहयोग मिलेगा या नहीं, पता नहीं । फकीर हूं सो मांग लिया । इस साल हर रोज़ सुबह – शाम मांगता रहूंगा उन उन पाँच तत्वों से, ऊर्जा से, परीचित-अपरीचित जाने – अनजाने लोगों से, सभी जीवित और मृत से, मनुष्यों से पक्षियों से पशुओं से भी । और बदले में जो भी दे सकता हूं, दूंगा । कोई मुझसे मांगकर देखे । मेरे पास हो और मैं ना दूं ऐसा नहीं होगा । हालाँकि जब मुझसे मांगा जाएगा वो ही परीक्षा का समय होगा । लेकिन मैं तो पदार्थ और ऊर्जा का चेतना युक्त सम्मीश्रण हूं । और इस चेतना और विवेक के अलावा पदार्थ और ऊर्जा तो मैंने प्रकृति से ही लिया है । मुझे वापस करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए ।

यह जो मानव समाज है, इसके भेद खोलना और अपने भौतिक उद्देश्य पूर्ण करना कठिन लगता है । पराजित लोगों ने वैराग्य और निवृत्ति का मार्ग अपनाया और संयोग से विजयी हो गए । छोड़ना ही पा लेना है शायद । बाकी जो भौतिक सांसारिक चीजों को चेज़ करते रहते हैं उनमें भी कुछ छिपे हुए संन्यासी  होते हैं ।

पिछले साल 2015 में JSTT अमित की मदद से तैयार हुआ, मेरी वजह से स्टेज तक नहीं जा पाया । स्क्रिप्ट राइटिंग असिस्टेंट का काम छोड़ा क्योंकि खुद अपने लिए रोल नहीं निकाल पाया, एक्टिंग पे काम नहीं हो पा रहा था, और मेरी छवि कुछ लोगों में अभिनेता के बजाए लेखक की होती जा रही थी । पैसा वैसे भी नहीं था और अगर मैं संभावना बना भी लेता तो भुना नहीं पाता क्योंकि अभिनय की प्रैक्टिस नहीं हो पा रही थी । अप्रैल में छोड़ा, और काम के लिए भागा । JSTT मई में कहीं अटक गया । थोड़ा निराश हो ही रहा था और कुछ OneDay-TwoDay किया कि Sharon Plywood Unbreakable का Charlie Chaplin वाला TVC मिल गया जुलाई में । अगस्त सितम्बर मस्ती में बीता । ऑडिशन चालू मगर कम रहे । दिसम्बर में कुछ दिन ‘Sadda Haq’ किया । फिर दिसंबर भी 2015 के साथ खत्म हो गया  । अब जनवरी 2016 की 1 तारीख है ।

न्यू ईयर हैप्पी तब माना जाएगा जब आर्थिक – सामाजिक – राजनैतिक रूप में उत्थान और विकास हो । यह समीक्षा 2016 के अंत में होगी अगर जीवन रहा तो । मानसिक – आत्मिक – आध्यात्मिक रूप से मैं पर्याप्त विकसित हूं और ज़्यादा होना गलत हो जाएगा । अभिनेता भी ठीक – ठाक हूं । अगर TV पर continuity मिल जाए तो बेहतर होगा ।

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