खोखलापन!

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अगर तड़प है तो वजह होगी ही होगी । वजह तो पता रहती ही है । वजह को नजरअंदाज कर तड़प को शांत तो नहीं किया जा सकता । तड़प तो भड़कती है और दावानल बन जाती है । ले डूबती है सबको । और जो तड़प इधर लगी है वो तो चिंगारी है, जो बाहर लगी है वो दावानल बन समूचे राष्ट्र को जला सकती है । संस्कृति के नाम पर रूढ़ियों और परंपराओ को थोपने वाले जल ही जाएँ तो बेहतर है । परंपरा अगर वजह खो चुकी हो तो तो उत्सव के दूसरे बहाने नहीं खोजे जा सकते? और नाक की सबको बड़ी चिंता है, और बदबू का कोई इलाज नहीं । सड़ांध हजारों सालों से आ रही है, नजरअंदाज किए जा रहे हैं ।

विश्व तो बहुत सी चीजों से भरा हुआ है । सजीव निर्जीव और अर्धमृतजीव भी हैं । पदार्थ से बने हुए शरीरों में चैतन्य की मात्रा अलग और भिन्न है । आश्चर्य यह है कि धारा के एक बहाव में भी जिनका चैतन्य जागरण हुआ उन्होंने धारा को जड़ता देने की ही कोशिश की । विकास को अवरुद्ध ही किया । पाप किया ।

एक ही मानव समाज के इतने रूप और भेद, कोई किसी का नहीं । बात सब प्यार की करते हैं और प्यार नहीं करने का जैसे संकल्प ले रखे हैं । तड़प सभी रहे हैं, और चार जनों के बीच अपने थोथे सम्मान की रक्षा के लिए जीवन भर दुःखी रहते हैं । इन चार जनों को लात मार के भगा जो दें तो खुशी महसूस हो, तो जीवन बचे । थोथे लोग, थोथा सम्मान । अच्छा, साँस भी कोई ठीक से नहीं ले रहा है । और साँस रूक जाने के खयाल से कांप जाते हैं ।

प्यार के लिए, प्यार करने का समय और प्यार सबके पास है, फिर भी सब दूर भागते हैं । अगर दो दिन प्यार में जी लें तो जीवन पूर्ण हो जाए । मगर ज़रूरी बात या तो समझ में नहीं आती या समय चूक जाने के बाद समझ में आती है । वैश्विक प्रेम की भावना बखान करने वाले किसी एक से प्रेम हो जाने का विरोध करते हैं । ईश्वरीय प्रेम के झूठे नाम पर प्यार की हत्या कर देने वाले यह मानवीय दैत्य बड़े चालबाज़ हैं ।

बुद्ध बोले कि विश्व जल रहा है । आग तो बुझ ही नहीं रही है, भस्म सब हो रहा है । सभी मर रहे हैं, मरे जा रहे हैं । मारने वाले भी वही, मरने वाले भी वही । पैदा होने की वजह तो है, मकसद न था; न है । झूठे, उधारी के मकसद ढोते हुए समय खत्म हो जाता है, और पता चलता है कि पूरी उम्र प्यार में जी सकते थे । फालतू की नफरत और झूठे सम्मान को जीने में जीवन चूक गया ।

तकलीफ है तो मर क्यों नहीं जाते? जीना छोड़ कर साँसो को घसीटते रहना क्या बड़ा त्याग है? दो दिन प्यार कर लें ते एक दिन और उम्र बढ़ जाए, या तीसरे दिन सुकून से मर पाएं ।

झूठे लोग!

Shraddhanshu Shekhar

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