धर्म की इंडिविडुअलिटी

वो उठा और लड़की के बाजू में जा कर बैठ गया, और लड़की की बांह में अपनी बांह डाल दी, और घूरते हुए बुड्ढे के नज़रिए का मज़ाक बनाते हुए कहा,

‘मैं तो लड़की के बाजू में बैठूंगा, क्योंकि नारी तो शक्ति है और आदमी कुत्ता । कुत्ते को जब शक्ति मिल जाती है तो वो घोड़ा बन जाता है ।’

कुछ लोग जो वहां साथ बैठे थे, घटना का मज़ा ले रहे थे । सब लोग लड़के का समर्थन नहीं करते थे मगर वो भी मुस्कराते हुए देख और सुन रहे थे ।

‘बात तो समझ में आई नहीं होगी । दिमाग का खुलना ज़रूरी है । अगर दिमाग दो चार धार्मिक किताबों में ही फंसा रहेगा तो बाकी समझदारी कैसे आएगी?’ लड़का बोला ।

बाजू में बैठी लड़की अब दांत दिखाकर हँसने लगी मगर चुपचाप । बाकी लोग नीचे या दाएँ बांए देखकर मुस्कुराने लगे । बुड्ढा और आंखे तरेरने लगा । उसे समझ आने लगा कि वो किसी आधुनिक युग में है और यहां पुरानी बात या अनुभव की धौंस नहीं चलेगी । बुड्ढा चुप रहा ।

‘अब आपका कहना है कि बांए हाथ से कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता । लेकिन दाओ में तो लेफ्ट हेंड से ही दिया जलाया और बुझाया जाता है ।’ लड़का चालू रहा ।

‘हां । हमारीसंस्कृति में ऐसा ही होता है ।’ बुड्ढा बिलबिलाया ।

‘अब आप हमारी तुम्हारी संस्कृति में विभाजित कर रहे हैं हमें ।’ लड़के ने भड़काया ।

‘क्यों? आप भारतीय नहीं हैं क्या?’ बुड्ढा घेरे में आने लगा ।

‘भारतीय हूं, हिंदू नहीं हूं।’ लड़का कट मारकर निकला ।

‘मतलब?’ बुड्डा चौंका । ‘तुम मुस्लिम हो?’ बुड्ढा फंसा ।

‘क्यों? नहीं, आप मेरा धर्म क्यों जानना चाहते हैं ।’ लड़का चमकने लगा । ‘पहले मेरे नाम से आपने मेरे धार्मिक विश्वास का गलत अनुमान लगाया । और हां, मैं मुसलमान भी नहीं हूं ।’

‘तो फिर?’ बुड्ढे की क्यूरिऑसिटी बढ़ गई ।

‘मैं क्यों बताऊं?’ लड़का खेलने लगा ।

‘इसमें छुपाने की क्या बात है । हम नहीं छुपाते अपना धर्म ।’ बुड्ढा हीरो बनने की गलती कर बैठा ।

‘धर्म नितांत इंडिविजुअल चीज़ है। एकदम प्राइवेट । जैसे चड्डी । चलो मीनिंग रिप्लेस करते हैं । धर्म माने चड्डी, मानना याने पहनना । अब वापस से पूछो सवाल ।’ लड़का अब कृत्रिम विनम्र हो गया । लड़की खुद को ट्रेडिशनल दिखाने के चक्कर में शरमाते हुए नीचे देखनेे लगी । बाकी लोग आगे होने वाली बात का अंदाज़ा लगा कर फिर मुस्कराने लगे ।

बुड्ढा ज्ञानी होने के बोझ वाले एक्सप्रेशन के साथ बोला जैसे एहसान कर रहा हो, ‘आप कौन सी चड्डी पहनते हो?’

‘देखिए ये बात बहुत प्राइवेट है, नितांत इंडिविजुअल चीज़।’ लड़के ने फिर गेम खेला । ‘यहाँ सब अलग अलग तरह की अलग अलग कलर की चड्डी पहनते हैं । ज़रूरी नहीं कि सभी लोग चड्डी पहनते ही हों । कोई चड्डी नहीं भी पहनता होगा मतलब धर्म मुक्त भी लोग होते हैं । तो ये पूछना कि कौन सा धर्म मानते हो या कौन सी चड्डी पहनते हो, नितांत इंडिविजुअल प्रश्न है । ऐसे किसी से नहीं पूछना चाहिए ।’ लड़के ने समझदार आदमी की तरह कहा ।

बुड्ढा लंबी सांस के साथ बोला ‘तुम्हारे साथ बात करना मुश्किल है।’

‘किर्केगार्दे तो कहता है कि बात करना ही पाॅस्सीबल नहीं है, सिर्फ इंफर्मेशन एण्ड प्रार्थना और आदेश ही सही बातचीत है ।’ लड़के ने लंबी छलाँग मारा जहां बुड्ढे का बाप भी नहीं पहुंच सकता था । ‘अपनी सो-काॅल्ड होली बुक्स के कुएँ से बाहर आकर कुछ समझने लायक बनोगे तो समझ आएगा ना!’

लड़के ने बहुत अपमानित किया । और बुड्ढा इसी का हकदार था । लड़की की नज़र लड़के को गर्व से देख रही थी । बाकी लोग मतिमूढ़ जैसे बिहेव कर रहे थे कि अब आगे क्या । लड़का विनम्र था और बुड्ढा खिसियानी बिल्ली ।

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