मुस्तफ़ा कमाल पाशा अतातुर्क

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फेसबुक पर किसी ने अतातुर्क के विषय में पोस्ट डाली थी उसे यहाँ कॉपी कर रहा हूँ, जानकारी अक्षरस: सत्य है, आप सब भी जाने अतातुर्क के बारे में-

20वीं सदी में , टर्की जो की एक जाहिल इस्लामिक देश था वहाँ एक राष्ट्रपति हुए ‘मुस्तफा कमाल अतातुर्क’. उन्होंने 10 साल के अन्दर टर्की को एक जाहिल इस्लामिक देश से एक modern पढालिखा progressive देश बना दिया .

सबसे पहले उन्होंने एक अभियान चलाया और टर्की को उसकी अरबी जड़ों से काट के तुर्की आत्मसमान को जागृत किया .सबसे पहले उन्होंने देश में अरबी भाषा पे प्रतिबन्ध लगा दिया . अरबी लिपि को त्याग कर Latin आधारित नयी लिपि तुर्की भाषा के लिए विकसित की . उन्होंने देश के शिक्षा विदों से पूछा , हम कितने दिनों में पूरे देश को नयी तुर्की लिपि सिखा देंगे ?3 से 5 साल में ?राष्ट्रपति ने कहा 3 से 5 महीने में करो ये काम ………उन्होंने कुरआन शरीफ को नयी तुर्की लिपि में लिखवाया . मस्जिदों से अरबी अजान बंद कर दी गयी . अब अजान तुर्की भाषा में होती थी . अतातुर्क ने कहा हमें अरबी इस्लाम नहीं चाहिए . हमें तुर्की इस्लाम चाहिए . हमें अरबी भाषा में कुरआन रटने वाले मुसलमान नहीं चाहिए बल्कि तुर्की भाषा में कुरआन समझने वाले मुसलमान चाहिए.

उन्होंने Turkey को इस्लामिक state से एक सेक्युलर state बना दिया .उन्होंने इस्लामिक शरियत की शरई courts जो सदियों से चली आ रही थी उन्हेंबंद कर दिया और तुर्की का नया कानून बनाया जो इस्लामिक न हो के modern था .इसके बाद उन्हें मुस्लिम सिविल कोड को abolish कर Turkish सिविल कोड बनाया . मौखिक तलाक गैर कानूनी कर दिया . 4 शादियाँ गैर कानूनी कर दी . family planning अनिवार्य कर दी .

अतातुर्क ने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था बदल दी . नयी तुर्की लिपि में पाठ्य पुस्तकें लिखी गयी .मदरसों और दीनी इस्लामिक शिक्षा पे प्रतिबन्ध लगा दिया गया . पूरी तुर्की में modern शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया . नतीजा ये निकला की सिर्फ 2 सालों में देश में साक्षरता 10% से बढ़ के 70 % हो गयी .

सबसे बड़ा काम जो अतातुर्क ने किया वो देश के इस्लामिक पहनावे और रहन सहन को बदलदिया . इस्लामिक दाढ़ी , कपडे , पगड़ी प्रतिबंधित कर दी . पुरुषों को पगड़ी की जगह Hat पहनने की हिदायत दी गयी .महिलाओं के लिए हिजाब नकाब बुर्का प्रतिबंधित कर दिया . देखते देखते महिलाएं घरों से बाहर आ के पढने लिखने लगी और काम करने लगी ……..पर्दा फिर भी पूरी तरह ख़तम न हुआ था .इसके लिए अतातुर्क ने एक तरकीब निकाली . वेश्याओं के लिए बुर्का और पर्दा अनिवार्य कर दिया . इसका नतीजा ये निकला की जो थोड़ी बहुत महिलाएं अभी भी परदे में रहती थी उन्होंने एक झटके में पर्दा छोड़ दिया . अतातुर्क ने रातों रात देश की महिलाओं को इस्लामिक जड़ता और गुलामी से मुक्त कर दिया ………

उन्होंने महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिया . 1935 के आम चुनावोंमें तुर्की में 18 महिला सांसद चुनी गयी थी . ये वो दौर था जब की अभी बहुत से यूरोपीय देशों में महिलाओं को मताधिकार तक न था .

मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने सिर्फ 10 साल में इस्लामिक Ottoman empire के एक जाहिल देश को एक modern देश बना दिया था..!!

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