अषाढ़ी पूर्णिमा


आज हैं – बौद्ध धम्म की जन्म तिथि :अषाढी पूर्णिमा 

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गौतमबुद्ध के द्वारा  प्रथम धम्म उपदेश- धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के अवसर पर आप सब को हार्दिक बधाई, मंगल कामना ।

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बोधिसत्व सिद्धार्थ गौतम छः साल की साधना के बाद  वैशाखी पूर्णिमा की रात को सम्यक संबोधि प्राप्त करके बुद्ध हुए ।बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व प्राप्त करने के पश्चात गौतमबुद्ध ने सोचा,  जो ज्ञान मैंने पाया हैं, जिस दिव्य घटना का मैंने अनुभव किया हैं, वह इतने सूक्ष्म हैं कि शब्दों में उसको कहना कठिन हैं । उन्होंने सोचा कि जो मैंने पाया हैं, वह इतना सूक्ष्म हैं कि शब्दों में उसका बयान नहीं किया जा सकता, सिखाया नहीं जा सकता ।अतः मैं खामोश रहूँगा ।चुप रहूँगा । मैंने जो पाया हैं, वह स्वअनुभव से समझा जा सकता हैं और पाया जा सकता हैं ।अतः मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा ।
बाद में बुद्ध ने अपने ज्ञान को  बांट ने का विचार किया ।

✅ पहले आलार कालाम को ज्ञान देने का सोचा । बुद्ध ने अपने दिव्य चक्षु से देखा की आलार कालाम एक सप्ताह पहले मृत्यु प्राप्त कर चुके हैं ।

✅ फिर सोचा कि मैं उद्दक रामपुत्त को ज्ञान बांटु । बुद्ध ने दिव्य ज्ञान से देखा कि उद्दक रामपुत्त अगली रात्रि को मृत्यु पाये हैं । 

✅फिर बुद्ध के मन में आया कि मेरे पहले पाँच साथी मुझे छोड़कर गये हैं उन्हें ज्ञान देना चाहिए क्योंकि उन्होंने मेरी खुब सेवा की हैं । बुद्ध ने जाना की पाँच साथी अभी वाराणसी के ऋषिपतन मृगदाय में साधना कर रहे हैं । वे पाँच साथी ज्ञान के अधिकारी हैं ।
✅बुद्ध बोधगया से वाराणसी के तरफ चल पडे । 11 दिन की सफर के बाद बुद्ध अषाढी पूर्णिमा के दिन वाराणसी मृगदाय में पहुंचे ।
✅उसी दिन बुद्ध ने पंचवर्गिय परिव्राजक को प्रथम धम्म उपदेश दिया ।
☸ जिसे इतिहास में धम्मचक्कप्पवत्तन के नाम से जाना जाता हैं ।☸
🌳धम्मचक्कप्पवत्तनसुत्त बुद्ध धर्म का सार तत्व हैं ।

🌳 इसी धम्मचक्कप्पवत्तनसुत्त को ही मज्झिमा पटिपदा और आर्य अष्टांगिक मार्ग तथा चार आर्य सत्य भी कहा जाता हैं ।
🔔भगवान बुद्ध ने कहा –
 भिक्षुओ ! दो अतियों को छोड दो ।

✅दो अतियों का सेवन करना अनर्थ हैं, अज्ञानता हैं ।

🌿जैसे काम सुख में आसक्त हो लिप्त होना ।

🌿दूसरा, शरीर को अति पीड़ा देना, अति कष्ट देना ।

✅इन दो अतियों को छोड मैंने मध्यम मार्ग खोजा हैं जो आंख देने वाला हैं, सुख देने वाला हैं ,  शान्ति देने वाला हैं, ज्ञान देने वाला हैं, आनंद देने वाला हैं ।

✅मध्यम मार्ग ही आर्य अष्टांगिक मार्ग हैं –
🔔सम्यक दृष्टि,

🔔 सम्यक संकल्प,

🔔 सम्यक वचन,

🔔 सम्यक कर्म,

🔔 सम्यक आजीविका,

🔔सम्यक व्यायाम, 

🔔सम्यक स्मृति,

🔔 सम्यक समाधि ।

💐   💐   💐
बुद्ध ने उन्हें चार आर्य सत्य का ज्ञान दिया ।
उन्होंने बताया कि-

 ✅दु:ख हैं,

 ✅दु:ख का कारण हैं,

 ✅दुःख का निरोध हैं और

 ✅दु:ख निरोध का मार्ग हैं ।
☸बुद्ध ने आज अषाढी पूर्णिमा के दिन धम्म चक्र गतिमान किया और आदि कल्याणकारी, मध्ये कल्याणकारी और अंत में भी कल्याणकारी धम्म सर्वे प्राणीओं के  हित के लिए, मंगल के लिए, सुख के लिए, निर्वाण के लिए प्रकाशित किया ।☸
✅आज के युग में भी बुद्ध कल्याणकारी हैं, सिर्फ धम्म के मार्ग पर हमें चलना हैं ।
🍀बुद्ध हमारे में विकसित हो और हम दु:ख के छुटकारा पाये यही मंगल कामना के साथ धम्मचक्कप्पवत्तन दिन की मंगल कामना -बधाई ।🍀
💐नमो बुद्धाय 💐

💐नमो धम्माय 💐

💐नमो संघाय 💐 
🎄🎄सुप्रभात 🎄🎄

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