पारंपरिक विवाह 

​शादी हो रही थी ।
सब मेहमान, रिश्तेदार वगैरह, सब थे । दूल्हा और दुल्हन भी अपनी जगह बैठे थे । संस्कार कर्ता भी मंत्र गा रहा था । बड़ा पारंपरिक सा विवाह समारोह था । वैसे तो शादी ब्राह्मण समाज की थी मगर आजकल ग़ैर जाति वालों को भी बुलाना पड़ता है । दूल्हा और दुल्हन ब्राह्मण जाति के थे और शादी पूरी तरह से अरैंज्ड मैरिज थी, दोनों के माँ-बाप की मर्ज़ी से । हां, दहेज़ वगैरह की बात भी हो गई थी ।
मेहमानों में किसी ने लड़की को पहचान लिया ।
‘अरे! यह? यह तो उसकी गर्लफ्रैंड है, मतलब थी, और अब किसी दूसरे से शादी कर रही है । धोखा दे दी ना ! यह लड़कियाँ होती ही धोखेबाज़ है । बेवफ़ाई खून में होती है इनके । वैसे वो भी कोई ठीक थोड़े ही है । चार-चार लड़कियाँ घुमाता था । इससे बोर हो गया होगा तो छोड़ दिया होगा । और यह भी कोई कम थोड़े है, इसके भी चार-चार चक्कर रहे होंगे, कौन जानता है । लड़के के अफेयर हों तो चलता है, लड़की का तो कैरेक्टर खराब हो गया ना ! बहुत लड़कों से दोस्ती हैं इसकी भी । जाने दो । जिसका पाप-धर्म वो जाने, मुझे क्या!’
‘मुझे क्या!’ कहकर भी भूलने की कोशिश बेकार रही, पड़ोसी से चुगली हो गई, बात लीक हो गई । और भी कुछेक लोगों को पता था लड़की का इतिहास, मगर सब चुगलखोर नहीं होते ।
‘हैं? सच में?’

‘हां, वो मेरा दोस्त है । इसके साथ फोटो दिखाऊं उसकी?’
चैलेंज हुआ,

बाज़ी लगी,

मूछों पर ताव दिए गए,

‘अगर यह मेरे दोस्त की एक्स गर्लफ्रेंड साबित कर दिया तो क्या?’
कुछ को लगा बात सही है, कुछ जानकर भी दबाना चाहते हैं, मगर अब तो लड़की के कैरेक्टर को बुरा साबित करना कुछ के आत्मसम्मान की बात हो गई थी, बात जो निकल गई थी । दूल्हा दुल्हन और बाकी मेहमानों तक बात नहीं पहुंची थी ।
व्हाट्सअप पे फोटो मंगवाए गए । हो गया साबित कि शादी से पहले लड़की का चक्कर दूसरे लड़के से था । लड़के वालों के तरफ के किसी ने देख लिया । बात दूल्हे के बाप तक पहुंची और शादी रूक गई । माना गया कि लड़की बदनाम है, लड़की वालों ने बहुत रिक्वेस्ट की, दहेज बढ़ाकर भी कोई फायदा नहीं । 

बारात वापस ।
लड़की वालों ने मजाक उड़ाने वाले अंदाज में लड़की के माँ बाप को सांत्वना दी और घर जाने लगे । लड़की के माँ बाप ने लड़की को खूब कोसा और थक कर बैठ गए । लड़की नहीं रोई । वो बचे हुए मेहमानों में से एक लड़के के पास पहुंची और उसका हाथ पकड़ कर मंडप में बैठ गई । यह लड़का दुल्हन का दोस्त है, गैर-ब्राह्मण है, शायद हिंदू नहीं है, अमीर भी नहीं है । लड़की ने अचानक फैसला लिया, माँ बाप को अब कोई मतलब ऐसे भी नहीं रहा, लड़की जो चाहे, करे । पंडित ने अपना काम किया । शादी हो गई ।
यह लड़की साहसी थी ।

लड़के ने कोई आपत्ति नहीं की, जैसे तैयार ही था या उसे पता था ऐसा होने वाला है । लड़की का इतिहास उसे भी पता था मगर उसे सब स्वीकार था । हां, उसे भी लड़की अच्छी लगती थी मगर जाति-धर्म की बाधा थी । लड़की जब परिवार फैमिली से आजाद हो गई तो अपनी पसंद से शादी कर ली ।
हो गया ।

ऑनर-कीलिंग की संभावना थी । सरकारी कानून और आधुनिकता लट्ठ लोगों के दिमाग में नहीं आते । उनके लिए जाति, धर्म, संस्कार, संस्कृति, पैर छूना, घूंघट, यही सब है । जब कुछ बस ना चले तो ऑनर कीलिंग । मगर यहां ऑनर कीलिंग नहीं हुई । गांव नहीं है, जजमानी प्रथा नहीं है, कि बहिष्कृत कर दिए तो पहाड़ टूटेगा ।

00:01 a.m. Thursday,

1st of September 2016

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