मुझे खुद में ज़िंदा रखना 

यार सुनो ना !

देखो,

अभी तुम जा रही हो,

मैं यह नहीं कहता

कि तुमसे कोई ऐसी बड़ी बात कहनी है ।

मैं बस इतना कहना चाहता हूं

कि मैं तुम्हें याद करूँगा;

मैं तुम्हें बहुत मिस करूँगा

तुम्हारे जाने के बाद ।
और मैं ऐसा नहीं कहता कि कभी हम दोबारा मिलेंगे, 

या कोई वचन नहीं देता

और कोई झूठी बात नहीं कहना चाहता ।
मैं कोई ऐसी इमोशनल बात भी नहीं कहना चाहता

जो बड़ी फालतू सी हो ।
सिर्फ इमोशन है !

इमोशन के सिवा कुछ भी ऐसा नहीं है

जो बाँध के रखता हो

एक दूसरे से ।

और कौन किससे बँधा है

ये बस एक दूसरे को ही पता होता है ।
मेरे क्या इमोशन हैं तुम्हारे लिए

ये सिर्फ मुझे पता है ।

तुम्हारे इमोशन मेरे लिए क्या हैं

ये तुम्हें पता है ।

तुम मुझसे कितनी बंधी हो

ये तुम्हें पता है

मैं तुमसे कितना बंधा हूं

ये सिर्फ मुझे पता है ।
तो

हो सकता है

यह बात, जो मैंने कहा

ये फालतू हो,

लेकिन मैं सिर्फ एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं,

और वो रिक्वेस्ट सिर्फ ये है –

कि ‘तुम मुझे भूलना मत ।’
मैं ऐसा महसूस करता हूं

कि तुम्हारे जाने के बाद

मैं तुम्हें बहुत मिस करूँगा,

कितने दिनों तक

ये मुझे नहीं मालूम ।
लेकिन

मेरा दिल रो रहा है,

और मैं कुछ नहीं कर सकता ।
मैं इतना बेबस हूं

कि तुम्हें बता भी नहीं सकता

कि मैं दुखी हूं ।

इतना लाचार हूं

कि जता भी नहीं सकता

कि मैं तुम्हें…

जो भी ।
तो

मेरी बस इतनी सी प्रार्थना है –

‘मुझे याद रखना’

‘मुझे भूलना मत ।’
भले हम कभी न मिलें,

भले हम कभी फोन पे बात न कर पाएँ,

भले आज की हमारी इन्फाॅर्मल सी ये मुलाकात

ज़िंदगी भर के लिए हमारी आख़िरी मुलाकात ही क्यों न हो,

मुझे ‘अपने में ज़िंदा रखना’

‘मुझे भूलना मत ।’

‘मुझे याद रखना ।’
मैं ज़िंदा रहना चाहता हूं ।

तुम में ।

बस

इतनी सी ही मेरी बात थी ।
तुम्हें नहीं मालूम है

कि तुम्हारे जाने से मैं कितना दुखी होने वाला हूं ।
मैं अभी दुखी हूं

क्योंकि तुम कल जा रही हो ।
मैं तुम्हें फाॅर्मल तरीके से विदा नहीं कर पाया ।

मैंने तुम्हें जानबूझकर अनदेखा किया ।
मैं दोषी हूं,

मेरा यह व्यक्तित्व दोषी है,

जो दबा हुआ, छिपा हुआ, पिछड़ा हुआ है ।

मैं अपनी भावनाओं को उंडेलकर

चुप हो जाना चाहता हूं ।
कोई बात नहीं अगर मेरी ये भावनाएँ

तुम तक पहुँची या नहीं पहुँची,

कोई बात नहीं..

लेकिन जो कुछ बह रहा है –

मुझसे, मेरे भीतर से,

वो कहीं से कभी भी अगर तुम तक पहुँचे

तो इसका थोड़ा सम्मान कर लेना ।

मेरा कोई सम्मान हो

ऐसी कोई बाध्यता नहीं है ।

मेरी फीलिंग्स की

थोड़ी क़द्र कर लेना ।
मुझे बहने से कोई रोक नहीं सकता है

लेकिन ये जब भी तुम तक पहुँचे,

इसे रोक लेना ।

क्योंकि ये तुम्हारे लिए बहा है

तुम्हारे लिए ही बहता रहा है

तुम ही इसे रोक सकती हो

अपने में जज़्ब कर सकती हो

मुझे खुद मे ज़िंदा रख सकती हो ।
— श्रद्धांशु शेखर 

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