निजता बोध

हर एक का यहां अपना तरीका है

अपना मज़हब है

अपनी आध्यात्मिक आस्था है

अपनी राजनैतिक विचारधारा है

अपनी भाषा है

अपना तरीका है सोचने का

सबके अपने निजी मायने हैं अल्फ़ाज़ों के ।
हर एक की ज़िंदगी का यहां

अपना एक मिशन है

क्योंकि

हर एक यहां अपनी ज़िंदगी को

अपने तरीके से जीना शुरू करता है ।
जब कोई

अपनी ज़ात (निजता) को छोड़कर

किसी और के मतलब के लिए

जीना

सोचना

महसूस करना

हंसना और रोना शुरू करता है,
किसी और की बताई

राह

किताब

तरीका

को अपनाकर,
किसी और की मंज़िल

किसी और के ख़्वाब

को पूरा करने के लिए,
तो,
उसका

अपना तरीका

अपना मज़हब

अपनी आध्यात्मिक आस्था

अपनी राजनैतिक विचारधारा

अपनी भाषा

अपना सोचने का तरीका

उसकेे अल्फ़ाज़ों के अपने निजी मायने

अपनी क़ीमत खो देते हैं ।
और ज़िंदगी

और ज़िंदगी का अपना मक़सद

अधूरा रह जाता है ।
हर एक को खुद ही अपना

और अपनी ज़िंदगी का मक़सद

खुद की तरफ देखकर

खुद के अंदर टटोलकर

खुद को महसूस कर

पता करना होता है ।
कोई किताब

कोई सिद्ध ज्ञानी

कोई मज़हबी गुरु

कोई सियासी लीडर

कोई सिद्धांत या थ्योरी

कोई बुद्ध

किसी को उसका अपना खुद का

खुद को होने का

मकसद, या मिशन

नहीं बता सकता ।
हर एक को

अपनी राह खुद ही खोजनी होती है

क्योंकि

हर एक को यहां अपनी राह पर

अकेला चलना है

अपने होने के मकसद को पूरा करते हुए ।
श्रद्धांशु शेखर

03:12 am, Tuesday, 4th of September 2016

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