बंधक समय

यह स्थिति बड़ी कमज़ोर है – 

जब आप वर्तमान में हों 

भविष्य झूठा हो

अतीत नष्ट हो चुका हो

और वर्तमान भी धीरे धीरे सड़ रहा हो ।
बदबू आने लगी हो

कीड़े बिलबिलाने लगें हो

उम्मीदें खत्म हो चुकी हों

और फिर भी आप ज़िंदा हों

अश्वत्थामा की तरह ।
शापित, कुपित, व्यथित – 

अगर समय है तो गुज़रता भी हो

जीवन है तो मृत्यु भी हो

सुबह दिन हो बिना शाम की

तो बेहतर है सुबह न हो ।
वहाँ पर उन्मादी उत्पाती है

नशे में मर कर दफ्न हो चुके

जिनका ऑर्फन हो चुका समय

बंधक हो चौक पे बैठा है

टूटे डस्टबिन के पास ।
15:39 Monday 17th October 2016

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