संभावनाएँ परिणाम में 


एक राजा था ।

उसकी कोई प्रजा नहीं थी ।

वो जहां था, वहां अकेला ही था ।
एक दिन उसको राज्य में एक प्राणी दिखा ।

राजा बोला – ‘तुम मेरी प्रजा हो!’

प्राणी बोला – ‘ओके’
राजा ने प्राणी को कहा कि उसे आज्ञाकारी होना होगा,

प्राणी मान गया ।
प्राणी और राजा, दो ही थे राज्य में । प्राणी भी ईक्वल सुविधा लेता था, मगर वो प्रजा भी था, मंत्री भी, जज भी वही था, अपराधी भी वही था ।
प्राणी सबकुछ था लेकिन राजा नहीं था ।

राजा सिर्फ राजा था, और कुछ नहीं ।
एक दिन राजा मर गया ।

राज्य में प्राणी अकेला बचा ।

अब वो प्राणी 

1- किसी दूसरे राजा का वेट करेगा

2- किसी दूसरे प्राणी का वेट करेगा

3- अकेला रहेगा

4- राज्य छोड़कर कहीं और भाग जाएगा :-

– किसी दूसरे राजा की आधीनता स्वीकारने

– किसी दूसरे प्राणी को आधीन बनाने

– किसी समाज के साथ रहने
संभावनाएँ इससे ज़्यादा भी हो सकती हैं ।
प्राणी क्या करेगा – यह उसे भी नहीं पता, क्योंकि 

– उसका अपना अज्ञात इंस्टिंक्ट है

– परिस्थितियाँ हैं

– अंदर का मौसम है

– उपादान कारण भी हैं

तो,

जब तक प्राण है

कुछ भरोसा नहीं

और

प्राणों का भी कुछ भरोसा नहीं
अनिश्चितता है

लेकिन इंस्टिंक्ट, परिस्थितियाँ, अंदर का मौसम, उपादान कारण – ये निश्चित है ।

और संभावनाएँ इनसे बाहर नहीं हो सकती ।

परिणाम है

कार्य हुआ होगा

कारण भी रहा होगा 
कारण है

कार्य भी होगा

परिणाम भी होगा 

राजा था ही नहीं ।

प्राणी मरा हुआ था ।

राज्य व्यवस्था ठीक थी ।

00:54, Sunday, 30 October 2016

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