भीतर गहरे सुलगती आग का धुआँ 

एक दोस्त से बात हो रही थी

बात हो रही थी कि अगर आदमी को नींद न आने की बीमारी हो जाए तो वो आभासी और वास्तविक दुनिया का फर्क कर पाने की क्षमता खो देता है ।
मुझे कृत्या के बारे में पता है और मैंने कुछ अभ्यास भी किया था बहुत पहले ।

एक कहानी में जिस आदमी को अपने कट चुके हाथ के अब न होने का होश नहीं रहता, उसका अदृश्य हाथ भी काम करता है ।

ट्शुआंग ड्ज़ू (Chuang Zhu) ने ख्वाब देखा, वो तितली है । अचानक ख्वाब टूट गया । और अब सवाल कि वो मनुष्य हैं जिसने तितली होने का ख्वाब देखा या वो तितली है जो मनुष्य होने का ख्वाब देख रही है ।
भीतर बहुत गहराई है ।

मुक्तिबोध की गहराई में शून्य है, जिसका एक जबड़ा है और उसमें मांस काट खाने के दांत भी हैं ।
तो कृत्या को फील करना पूर्णता का भान देता है ।

यही स्थिति थोड़ी और ग्रेसपूर्ण होती है जब किसी काल्पनिक संरक्षक के वास्तविक और पक्षधर होने का भान हो । रिलैक्स और धैर्य के साथ काॅन्फिडेंस भी फील होता है ।
एक शराबी हाथ में एक पेटी लिए जा रहा था । पेटी में काफी छेद थे । पूछा कि पेटी में क्या है? बोला – नेवला है । क्यों ? क्योंकि नशे की अवस्था में उसे चारों ओर साँप दिखाई देते । कहा कि भई वो साँप तो तुम्हारे मन का भ्रम है जो सिर्फ नशे की हालत में होने पर नज़र आते हैं । बोला – ओके । इस पेटी में भी असली नेवला नहीं है, मैं सिर्फ मान कर चल रहा हूं कि इसमें नेवला है ।

वहम की काट वहम से ।
असली क्या है, पता नहीं ।

जो सच नहीं है उसे सच समझना या मान लेना और बाद में यह कहना कि धोखा हो गया, मेरे साथ ग़द्दारी हो गई, — दोष किसका ? 

ठंडा साॅफ्ट ड्रिंक और ठंडा साधारण पानी एक जैसा दिखा । पिया । ये तो साॅफ्ट ड्रिंक है, अच्छा लगा, दूसरा गिलास उठाया, यह ठंडा साधारण पानी ।

आंखे मेरी, इच्छा मेरी, वेटर ने धोखा नहीं दिया । गिलास एक जैसे थे ।
आत्मसम्मोहन या ऑटो सजेशन ही है प्रार्थना । पूजा प्रार्थना नहीं है । पलटकर आए या सीधे सीधे खुद के सामने इच्छा रखी जाए – लेकिन पता हो कि क्या चाहिए खुद को । इच्छा असली होनी चाहिए जो भीतर गहरे सुलगती आग का धुआँ सी हो । 
15:19 Saturday, 5th November 2016

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