अख्खड़ और उदासीन 

​Ta – हैलो!
Wo – (स्माइल करते हुए हाथ मिलाया)
Ta – कैसे हो?
Wo – अच्छा हूं ।
Ta – काफी दिनों बाद मिले ?
Wo – (smile)
Ta – क्या कर रहे हो आजकल? 
Wo – (no reply)
Ta – क्या कुछ चल रहा है?
Wo – कुछ नहीं चल रहा है ।
Ta – (with strange) ऐसा कैसे?
Wo – बस ऐसे ही।
Ta – लेकिन कैसे? कुछ तो कर रहे होंगे?
Wo – (no response)
Ta – सिर्फ मरा हुआ आदमी ही कुछ नहीं करता, समझे?
Wo – मैं मरा हुआ हूं ।
Ta – (reaction, 2 second pause to understand) मतलब हो क्या रहा है?
Wo – यह बात कितनी ज़रूरी है आपके लिए? अगर आपको पता न चले कि मैं क्या करता हूं, तो क्या हो जाएगा?
Ta – (strange and irritation) भाड़ में जाओ! अरे दोस्त है, पहचान का है, इतने दिन बाद मिला तो हालचाल पूछ लिया । इसमें भड़कने की क्या बात है..
Wo – मैं भड़का नहीं ।
Ta – हाँ! वो दिख ही रहा है!
Wo – पहले नहीं दिखा? 
Ta – (no response, exit)

बातचीत औपचारिकता से आवृत्त होने पर बेहतर है कि बातचीत न करूँ ।

क्या इतना अख्खड़ होना ठीक है?

बिल्कुल ठीक है ।
लोगों में क्या संदेश पहुँचेगा?

सब अपना अपना मतलब लगा लेंगे ।
इमेज क्या बनेगी?

लोग जैसी चाहें वैसी इमेज बनाएँ ।
इतना घमंड?

ज़रा भी नहीं ।
तो फिर?

क्या?
यह घमंड नहीं तो क्या है?

अपने से मतलब लगा ले ।

हर बात एक्सप्लेन (explain) करना बहुत बोझिल है। 

“आप नहीं समझे ।”
अगर मैं पहली बार नहीं समझा, और दूसरी बार पूछ नहीं रहा, मतलब मैं नहीं समझना चाहता । ज़बरदस्ती करने का कोई मतलब नहीं । ऐसे में या तो धमकी काम करेगी या लालच । मैं लालची हूं और डरपोक भी । लेकिन, अगर मैं पहली बार नहीं समझा, और दूसरी बार पूछ नहीं रहा, मतलब मैं नहीं समझना चाहता ।

20:30 Monday 7th November 2016

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