गणतंत्र दिवस पर सामंती पक्षी! 

​वापस आ रहा था गार्डन से

मंडी से गुजर रहा था

ऊपर कोई पेड़ या छत नहीं थी

आसमानी रंग का आसमान था

किसी पक्षी की बीट सर पे आ गिरी

एकदम भौरी पे

टप्प से ।
किस पक्षी की बीट थी नहीं पता

मगर निशानेबाज रहा होगा ।

मैं चल रहा था

वो भी उड़ रहा होगा ।
मुझे नहीं पता कि वो पुल्लिंग था या स्त्रीलिंग या तीसरा जेंडर

लेकिन निशानेबाज बनने की संभावना तो सभी में होती होगी 

विदाउट रिगार्ड्स टू रेस एण्ड कास्ट ।
मैंने छू कर देखा

उंगली पे चूने जैसा था ।

मैंने सूंघा नहीं

अंदाजा लगा लिया कि बीट है ।

मैंने रूककर ऊपर भी नहीं देखा

क्योंकि निशानेबाजी में दक्ष पक्षी का अगला निशाना मेरी आंख में लगता ।

दूसरी बात –

मैं चल रहा था और वो भी आसमान में रूका नहीं रहा होगा ।

यानी, में ऊपर देख सकता था ।
कोई उस सामंती फ्यूडल पक्षी को बताए,

भारत में अब सर पर मैला ढोने की प्रथा लगभग समाप्त हो चुकी है ।

मैं न सिर्फ सिर धो चुका हूं 

बल्कि सफेद हो चुके बालों पे डाई भी लगा चुका हूं ।

थोड़ी देर में नहा लूंगा ।
बीट करने वाले उड़ जा चुके

गंदे समझे जाने वाले धुल चुके

फ्यूडलों को चुपचाप मर जाने दिया जाए ।
09:42 am Thursday 26th January 2017

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