आम्बेडकर की विजय 

१९५० में अम्बेडकर का पुतला जलाने वाले, 

संविधान को जलाने वाले, 

तिरंगा को पैर से कुचलने वाले, 

जिन्होंने कभी अम्बेडकर जयंती नहीं बनाई … 
वे आज अम्बेडकर की माला जप रहे हैं !
यह आम्बेडकर की विजय है रूढ़िवादी लोगों पर, और जीत है उन तमाम लोगों की जिन्हें अब तक दबाकर रखा गया था ।

अब तो सबको ‘जय भीम’ कहना ही पड़ेगा! ना! बच नहीं सकते!
मैं तो गर्व से कहता हूं – ‘जय भीम!’
23:17 Friday 14th April 2017

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