तालाब किनारे की झोपड़ी

एक छोटा सा तालाब है ।

यह छोटी सी एक झील भी हो सकता है ।

आसपास कुछ पेड़ हैं मगर घने जंगल नहीं ।

घास है ।

तालाब का पानी साफ है और शाम को लोगों के पालतू जानवर यहां नहाने भी आते हैं ।

पक्षी सुबह शाम स्वाभाविक रूप से उड़ते हैं ।

तालाब से लगा एक छोटा सा घर है – झोपड़ी जैसा

पारंपरिक छोटा घर ।

घर कंक्रीट से बना है

अंदर जीवित रहने लायक सभी सुविधाएँ हैं लेकिन 

विलासिता की कोई वस्तु नहीं है ।

झोपड़ी के बाहर जैसी जितनी शांति है वैसी ही अंदर भी है ।

इस तालाब को झील कहें तो ज्यादा अच्छा है ।

इस झील और झोपड़ी के लगभग एक किलोमीटर दूर कुछ पहाड़ियां हैं पूरब में ।

दो तीन पहाड़ियां पश्चिम में भी हैं ।

दोनो तरफ पहाड़ों पर घने पेड़ हैं ।

सूरज हर सुबह इन्हीं पहाड़ों के पीछे से उगता और शाम को इन्हीं के पीछे छुपता है ।

इसमें कोई खेल नहीं है ।

झोपड़ी के अंदर बारिश का पानी नहीं रिसता ।

गरमी ज्यादा नहीं लगती और ठंडी बड़ी मजेदार होती है ।

यह झील एक छोटे से कस्बे की बाहरी सीमा पर है ।

शहर तो है ही नहीं दूर दूर तक ।

यहां इस कस्बे में और आसपास कोई बीमार नहीं होता, जाति – धर्म – राजनीति से अछूता कस्बा है ।

झोपड़ी के अंदर जो रहता है वो हजारों साल से

रह रहा है ।

तो भी कस्बे में डाॅक्टर, हाॅस्पीटल, स्कूल भी है ।
13:59 Sunday 25th June 2017

Photo : Google

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